सोलहकारण पूजा

सोलहकारण पूजा

सोलहकारण पूजा[षोडशकारण व्रत में] -अथ स्थापना-गीता छंद- दर्शनविशुद्धी आदि सोलह, भावना भवनाशिनी। जो भावते वे पावते, अति शीघ्र ही शिवकामिनी।।...

सुदर्शन मेरु पूजा

सुदर्शन मेरु पूजा

सुदर्शन मेरु पूजा अथ स्थापना-शंभु छंद त्रिभुवन के बीचों बीच कहा, सबसे ऊँचा मंदर पर्वत। सोलह चैत्यालय हैं इस पर,...

सिद्ध पूजा

सिद्ध पूजा

ऊध्र्वाधोरयुतं सबिन्दु सपरं ब्रह्म-स्वरावेष्टितं, वर्गापूरित-दिग्गताम्बुज-दलं तत्संधि-तत्त्वान्वितं। अंत: पत्र-तटेष्वनाहत-युतं ह्रींकार-संवेष्टितं। देवं ध्यायति य: स मुक्तिसुभगो वैरीभ-कण्ठी-रव:।।१।।   ॐ ह्रीं श्रीसिद्धचक्राधिपते! सिद्धपरमेष्ठिन्!...

सिद्ध परमेष्ठी पूजा

सिद्ध परमेष्ठी पूजा

सिद्ध परमेष्ठी पूजा[सर्वार्थसिद्धि व्रत में] –स्थापना–गीता छन्द– श्री सिद्ध परमेष्ठी अनन्तानन्त त्रैकालिक कहे। त्रिभुवन शिखर पर राजते, वह सासते स्थिर...

साधु परमेष्ठी पूजा(अट्ठाईस मूलगुण पूजा)

साधु परमेष्ठी पूजा(अट्ठाईस मूलगुण पूजा)

साधु परमेष्ठी पूजा(अट्ठाईस मूलगुण पूजा)== [अट्ठाईस मूलगुण व्रत में]-गीता छंद-जो नग्न मुद्रा धारते, दिग्वस्त्रधारी मान्य हैं। निज मूलगुण उत्तरगुणों से,...

सरस्वती पूजा

सरस्वती पूजा

[शारदा व्रत ,श्रुतस्कंध व्रत,श्रुतज्ञान व्रत,ज्ञान पचीसी व्रत में] जिनदेव के मुख से खिरी, दिव्यध्वनी अनअक्षरी। गणधर ग्रहण कर द्वादशांगी, ग्रंथमय...

सम्मेदशिखर पूजन

सम्मेदशिखर पूजन

सम्मेदशिखर पूजन [सम्मेदशिखर व्रत में] -अथ स्थापना- शंभु छन्द- गिरिवर सम्मेदशिखर पावन, श्रीसिद्धक्षेत्र मुनिगण वंदित। सब तीर्थंकर इस ही गिरि...

सप्तपरमस्थान पूजा

सप्तपरमस्थान पूजा

सप्तपरमस्थान पूजा [सप्तपरमस्थान व्रत में]-गीता छंद- श्री वीतराग जिनेन्द्र को, प्रणमूँ सदा वर भाव से। श्री सप्तपरमस्थान पूजूँ, प्राप्ति हेतू...

षट्खण्डागम पूजा

षट्खण्डागम पूजा

षट्खण्डागम पूजा [षट्खण्डागम व्रत एवम श्रुतपञ्चमी व्रत में] -स्थापना (शंभु छंद)- जिनशासन का प्राचीन ग्रंथ, षट्खंडागम माना जाता। प्रभु महावीर...

भगवान श्री सुमतिनाथ जिनपूजा

भगवान श्री सुमतिनाथ जिनपूजा

भगवान श्री सुमतिनाथ जिनपूजा[आकाशपंचमी व्रत में]-अथ स्थापना-गीता छंद- श्रीसुमति तीर्थंकर जगत में, शुद्धमति दाता कहे। निज आतमा को शुद्ध करके,...