अकलंक निकलंक अकलंक निकलंक
अकलंक निकलंक
रचयिता: ब्रह्मचारी हरिलाल जैन वर्ग: प्रथमानुयोग प्रकाशक: श्री कुन्दकुन्द कहान पारमार्थिक ट्रस्ट भाषा: हिंदी पुस्तक
Description:

प्रस्तुत पुस्तक में अकलंक और निकलंक दो भाईयों की कथा दी गई है जिनमें निकलंक ने जैन धर्म की सेवा के लिए प्राणों का बलिदान दिया और अकलंक ने जैन धर्म की महान प्रभावना की । बलिदान और प्रभावना के इन प्रसंगों को प्रस्तुत करता हुआ यह एक धार्मिक नाटक है।

<< Back