SIDDH-POOJA (JUGALKISHORE JI) / सिद्ध-पूजा (जुगलकिशोर)

SIDDH-POOJA (JUGALKISHORE JI) / सिद्ध-पूजा (जुगलकिशोर)

कवि श्री जुगलकिशोर युगल (हरिगीतिका) निज वज्र-पौरुष से प्रभो! अंतर-कलुष सब हर लिये |प्रांजल प्रदेश-प्रदेश में, पीयूष-निर्झर झर गये ||सर्वोच्च...

।। सोलहकारण पूजा ।।

।। सोलहकारण पूजा ।।

[षोडशकारण व्रत में] -अथ स्थापना-गीता छंद-दर्शनविशुद्धी आदि सोलह, भावना भवनाशिनी।जो भावते वे पावते, अति शीघ्र ही शिवकामिनी।।हम नित्य श्रद्धा भाव...

।। सुदर्शन मेरु पूजा ।।

।। सुदर्शन मेरु पूजा ।।

अथ स्थापना-शंभु छंदत्रिभुवन के बीचों बीच कहा, सबसे ऊँचा मंदर पर्वत।सोलह चैत्यालय हैं इस पर, अकृत्रिम अनुपम अतिशययुत।।निज समता रस...

।। सरस्वती पूजा ।।

।। सरस्वती पूजा ।।

[शारदा व्रत ,श्रुतस्कंध व्रत,श्रुतज्ञान व्रत,ज्ञान पचीसी व्रत में]जिनदेव के मुख से खिरी, दिव्यध्वनी अनअक्षरी।गणधर ग्रहण कर द्वादशांगी, ग्रंथमय रचना करी।।इन...

।। श्री सिद्ध परमेष्ठी पूजा ।।

।। श्री सिद्ध परमेष्ठी पूजा ।।

अथ स्थापना-शंभु छंदसिद्धी के स्वामी सिद्धचक्र, सब जन को सिद्धी देते हैं।साधक आराधक भव्यों के, भव भव के दु:ख हर...

।। सम्मेदशिखर पूजन ।।

।। सम्मेदशिखर पूजन ।।

[सम्मेदशिखर व्रत में] -अथ स्थापना- शंभु छन्द-गिरिवर सम्मेदशिखर पावन, श्रीसिद्धक्षेत्र मुनिगण वंदित।सब तीर्थंकर इस ही गिरि से, होते हैं मुक्तिवधू...

।। सिद्ध परमेष्ठी पूजा ।।

।। सिद्ध परमेष्ठी पूजा ।।

[सर्वार्थसिद्धि व्रत में] –स्थापना–गीता छन्द–श्री सिद्ध परमेष्ठी अनन्तानन्त त्रैकालिक कहे।त्रिभुवन शिखर पर राजते, वह सासते स्थिर रहें।।वे कर्म आठों नाश...

।। निर्वाण क्षेत्र पूजा ।।

।। निर्वाण क्षेत्र पूजा ।।

-अथ स्थापना (गीता छंद)-चौबीस तीर्थंकर जिनेश्वर जहाँ जहाँ से शिव गये।गणधरगुरू अन्यान्य संख्यों साधु जहाँ से शिव गये।।वे सर्व थल...

।। जिनवाणी पूजा ।।

।। जिनवाणी पूजा ।।

-शंभु छंद-तीर्थंकर के मुख से खिरती, अनअक्षर दिव्यध्वनी भाषा।बारह कोठों में सबके हित, परिणमती सर्वजगत भाषा।।गणधर गुरु जिन ध्वनि को...

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